संघ संगठन ने असंतुष्टों को मनाने के लिए बनाए दो नए फार्मूले - Bichhu.com

संघ संगठन ने असंतुष्टों को मनाने के लिए बनाए दो नए फार्मूले

Sangh organization created two new formulas to convince dissidents

भोपाल (राजीव चतुर्वेदी/बिच्छू डॉट कॉम)। प्रदेश में मंत्रिमंडल में स्थान न पाने वालों की नाराजगी दूर करने के लिए संघ और संगठन ने मिलकर दो नए फार्मूला तैयार किए हैं। इनमें पहले फार्मूला में नेताओं को निगम मंडलों व विभिन्न प्राधिकरणों की कमान सौंपना है। इसी तरह से दूसरे फार्मूला के तहत शेष रहे विधायकों के साथ ही सरकार से नाराज चल रहे सासंदों को सहकारिता संस्थाओं की कमान देना शामिल है। इसके तहत उन्हें सहकारी बैंकों में प्रशासक का पद दिए जाने का प्रस्ताव है। इसमें खास बात यह है कि नेता की वरिष्ठता के हिसाब से उन्हें कैबिनेट और राज्य मंत्री का दर्जा दिया जाएगा। इनमें उन नेताओं को भी समायोजित कर खुश किया जाएगा, जिन्हें उपचुनाव में टिकट नहीं दिया जाना है, लेकिन वे इलाके में प्रभावशाली होने के साथ ही पूर्व में विधायक रह चुके हैं और अब भी मजबूत दावेदार माने जाते हैं। दरअसल पार्टी में अभी कई वरिष्ठ विधायक ऐसे हैं जो मंत्रीपद के सबसे मजबूत दावेदार हैं, लेकिन कांग्रेस के बागियों की वजह से उनका मंत्री बनना मुश्किल बना हुआ है। यही वजह है कि उन्हें संतुष्ट करने के लिए संगठन इन विधायकों को आश्वस्त कर रहा है कि सभी को मंत्री नहीं बनाया जा सकता है , ऐसे में उन्हें कहीं और मौका दिया जाएगा। यही वजह है कि पार्टी कुछ विधायकों को प्रदेश पदाधिकारी तो कई वरिष्ठ विधायकों को निगम-मंडलों में अध्यक्ष बनाकर कैबिनेट मंत्री का दर्जा देने की तैयारी कर रही है। इसके अलावा उन्हें सहकारी संस्थाओं की कमान भी देने पर गंभीरता से विचसार कर रही है। हालांकि कुछ दावेदार चाहते हैं कि अगर उन्हें मंत्री पद नहीं दिया जाता है तो फिर उपचुनाव से पहले उन्हें निगम मंडलों की कमान दे दी जाए। माना जा रहा है कि इस पर संगठन मंत्रिमंडल विस्तार के बाद मंथन करेगा। वहीं सहकारी बैकों में प्रशासक के रूप में विधायकों की नियुक्ति का रास्ता साफ करने के लिए सरकार विधानसभा के पावस सत्र में विधेयक लाने की तैयारी मे है। बतौर प्रशासक उन नेताओं को कमान देने पर विचार हो रहा है जो दूसरी से तीसरी बार चुनकर आए हैं।

होगी नई पंरपरा की शुरुआत
अगर सरकार इस तरह का कदम उठाती है तो प्रदेश में भाजपा सरकार की यह नई पंरपरा होगी। अब तक की पंरपरा के मुताबिक भाजपा सरकार उन लोगों को ही निगम-मंडलों की कमान सौंपती आयी है जो संगठन के लिए समर्पण के साथ काम करते रहे हैं। इनमें वे नेता भी शामिल होते थे, जिन्हें किन्हीं कारणोंवश पार्टी विधानसभा का टिकट नहीं दे पाती थी, उन्हें निगम-मंडलों में एडजस्ट कर दिया जाता था। इसके साथ ही उन नेताओं को भी मौका दिया जाता रहा है, जो विधानसभा चुनाव हार गए पर जातिगत समीकरणों के हिसाब से पार्टी के लिए महत्वपूर्ण माने जाते रहे हैं।

34 जिला सहकारी बैंकों में मिल सकती है कमान
प्रदेश में फिलहाल 38 जिला सहकारी बैंक कार्यरत हैं। इनमें से तीन की कमान अध्यक्षों के हाथ में है, जबकि एक का मामला अभी न्यायालय में लंबित है। इसके चलते फिलहाल 34 में ही प्रशासक की नियुक्ति की जा सकती है। इसके अलावा कई अपैक्स बैंक भी हैं, जिनकी कमान विधायकों व सांसदों को कमान दी जा सकती है।

सदस्यता होना जरुरी
इन बैकों की कमान उन्हें मिल सकती है जो इन संस्थाओं के प्राथमितक सदस्य होंगे। कई सांसद और विधायक तो पहले से ही सदस्य हैं, लेकिन जो सदस्य नही हैं उन्हें सदस्य बनना होगा और जिनकी सदस्यता समाप्त हो चुकी है, उन्हें सदस्यता जीवित करानी होगी।

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