पहले दारू ने उड़ाए होश, अब रेत ने निकाला सरकार का तेल - Bichhu.com

पहले दारू ने उड़ाए होश, अब रेत ने निकाला सरकार का तेल

भोपाल, (दीपेश मिश्रा/बिच्छू डॉट कॉम)। शराब ने पहले से ही शिवराज सरकार के होश उड़ा रखे थे, कि अब रेत ने उसका निकाल कर रख दिया है। आंकड़े बताते हैं कि सरकारी खजाने को शराब और रेत से सबसे ज्यादा कमाई होती है, लेकिन लाकडाउन में चौपट हुए शराब और रेत के कारोबार ने कंगाली की कगार पर लाकर खड़ा कर दिया है। लॉक डाउन के पिछले तीन महीने में राज्य सरकार को शराब से करीब 3 हजार करोड़ और रेत से 200 करोड़ का पलीता लगा है। दरअसल, वाणिज्यिक कर विभाग को अपनी शराब दुकानें बेचने के लिए ठेकेदार नहीं मिल रहे हैं। इससे शराब से प्राप्त होने वाले राजस्व को बड़ा झटका लगा है। सरकार द्वारा 25 फीसद राशि कम नहीं करने पर ठेकेदारों ने शराब दुकानें चलाने से मना कर दिया है। मजबूरन 1700 शराब दुकानों को सरकार को कम अवधि (एक हफ्ते) के ठेके देने का फैसला लिया है। लेकिन इनमें से भी दो सौ शराब दुकानें कोई लेने के लिए तैयार नहीं हो रहा है। बताते हैं कि सरकार ठेका राशि के 80 फीसदी पर भी दुकानें सौंपने को तैयार हैं, पर इन्हें चलाने वाले नहीं मिल रहे हैं। जो ठेकेदार दुकानों में रुचि दिखा रहे हैं, वे टेंडर में 43 से 50 फीसदी राशि भर रहे हैं। हम बता दें कि मध्यप्रदेश 3605 देशी-विदेशी शराब दुकानें हैं। इनमें से करीब एक हजार शराब दुकानें अब भी बंद हैं। इस वजह सरकार को करोड़ों रुपये का नुकसान हो रहा है। इनके बंद रहने सरकार को पिछले तीन महीने में अब तक 3 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा राजस्व का नुकसान हो चुका है।

रेत ने इसलिए दिया नुकसान
रेत से भी राज्य सरकार को बड़ा नुकसान हुआ है। बताते हैं कि लॉकडाउन में प्रदेश में रेत उत्खनन बंद रहने से सरकार को करीब 200 करोड़ का नुकसान हुआ है। लॉक डाउन की वजह से ठेके लेने के बावजूद ठेकेदारों ने रेत उत्खनन नहीं किया। इसके बाद उन्होंने राज्य सरकार के सामने तमाम ऐसी शर्तें सरकार के सामने रख दी, जिन्हें सरकार ने मानने से मना कर दिया। नतीजन रेत उत्खनन शुरू नहीं हो सका। राजस्व महकमे के सूत्र बताते हैं कि अभी ऐसी स्थिति दिसंबर 2020 तक बने रहने के आसार हैं।

फिलहाल खनन पर प्रतिबंध
बताते हैं कि बारिश के मौसम चलते रेत खनन पर पूरे चार महीने पर प्रतिबंध रहता है। ऐसे में अभी रेत खनन से सरकार को कोई राजस्व मिल पाएगा, ऐसी संभावना नहीं है।

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