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हां…ये समाजसेवी है सर्वशक्तिमान

भोपाल (राकेश व्यास/बिच्छू डॉट कॉम)। सिगरेट-गुटखे से टैक्स चोरी कर काली कमाई करने वाले किशोर वाधावानी को केंद्र की इंटेलिजेंस एजेंसियां जकडऩे की तैयारी में है, मगर उनके हाथ वाधवानी तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। टैक्स चोरी के साथ ही तस्करी, आबकारी, मनी लांड्रिंग, हवाला और बेनामी संपत्ति के मामले में घिरे वाधवानी पर अब तक कोई आंच नहीं आई है। सवाल यही उठ रहा है कि प्रदेश में आखिर वह कौन है, जिसके इशारे या दबाव में वाधवानी को अब तक राहत मिलती आ रही है। सवाल इसलिए उठ रहे हैं क्योंकि वाधवानी के खिलाफ समय-समय पर मामले सामने आए, लेकिन हर बार सांठगांठ अथवा रसूख के कारण कार्रवाई नहीं की जाती है। हाल के मामले में भी जिम्मेदारी सीधे कार्रवाई के बजाय नरम रुख अख्तियार किए हुए हैं।
इन केसों में प्रशासन ने दिखाई नरमी
केंद्रीय जांच एजेंसी की जांच में सिगरेट गुटखा तस्करी के सबूत मिले लेकिन न पुलिस और न ही आबकारी विभाग ने कोई कार्रवाई शुरू की। दिसंबर 2019 को जगदीश पालीवाल की शिकायत पर होटल वॉव की जमीन की धोखाधड़ी का केस ईओडब्ल्यू में दर्ज हुआ, जिसे वापस लेने के लिए धमकी दी। पालीवाल ने पुलिस व कोर्ट को दिए बयान में वाधवानी द्वारा धमकाने का जिक्र किया, पर केस दर्ज नहीं किया। भोपाल में कर्मचारियों से मारपीट व धमकी के मामले में पुलिस ने दर्ज किए पर कार्रवाई नहीं हुई। भोपाल में आप्रकृतिक कृत्य के साथ अन्य केस पुलिस ने खारिज कर दिया।
डीजी जीएसटी इंटेलिजेंस की सख्ती बेअसर
किशोर वाधवानी पर शिकंजा कसने के बाद सामने आई 400 रुपए की टैक्स चोरी उन अफसरों की नाक के नीचे की गई है, जो 24 घंटे निगरानी के लिए तैनात रहते थे। डायरेक्टर जनरल जीएसटी इंटेलिजेंस ओमप्रकाश दधीच का कहना है कि इन कंपनियों में ड्यूटी पर रहे जिम्मेदार अधिकारियों की पहचान कर उन पर कार्रवाई करेंगे। ऑपरेशन कर्क के तहत इस अभियान में सीजीएसटी इंदौर में पदस्थ एक दर्जन से ज्यादा अफसर जांच के दायरे में हैं। छापे की जद में आई सिगरेट कंपनियों में 24 घंटे तीन शिफ्ट में अफसर तैनात रहते थे। इन पर फैक्ट्री से बाहर जाने वाली हर सिगरेट पर जीएसटी सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी थी। मगर अब तक न तो एक भी अफसर पर गाज गिरी है और न ही एजेंसियां वाधवानी से उसकी करतूत उगलवा सकी हैं।
अखबार के नाम पर गुटखे का परिवहन
वाधवानी पर आरोप है कि लॉकडाउन के दौरान प्रशासन ने अखबार के परिवहन के नाम पर वाहनों की अनुमति ली और गुटखे का अवैध परिवहन किया। प्रशासनिक अनुमति के दुरुपयोग का आरोप केंद्रीय जांच एजेंसी ने लगाया लेकिन अनुमति जारी करने वाले प्रशासन ने जांच तक शुरू नहीं की। अनुमति का दुरुपयोग करने के मामले में प्रशासन सीधे कार्रवाई कर सकता है, लेकिन जिम्मेदार बच रहे हैं।
अघोषित स्रोत से आय पर 77 प्रतिशत लगेगा कर
ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) कार्रवाई की तैयारी कर चुका है। धारा -115 (बीबीई) के अनुसार यदि आय का स्रोत ज्ञात नहीं है यानी अघोषित स्रोत से आय हुई है तो उस पर 77.25 फीसदी की दर से कर लगता है।
फेमा का भी कस सकता है शिकंजा
वाधवानी के पास दुबई की नागरिकता भी है। विभागीय सूत्रों को आशंका है कि वाधवानी ने मोटी रकम से दुबई में भी धंधे जमा रखे हैं। इसी कड़ी में पकड़ाए माटा के पास पाकिस्तान की नागरिकता होने से वहां भी रकम भेजने की आशंका जताई जा रही है। इसकी पुष्टि होने पर फेमा (फॉरेन एक्सचेंज मैंनेजमेंट एक्ट) में कार्रवाई होगी।
अधिकारियों पर भी गिरेगी गाज
गुटखा-सिगरेट तस्करों के साथ ट्रांसपोर्टर, गुटखा-तंबाकू के लिए बिना बिल के रॉ मटेरियल उपलब्ध कराने वाले कारोबारियों पर कार्रर्वा होगी। विभाग के कई अधिकारियों पर गाज गिरना तय है। डीजीजीआई की टीम ने जांच के लिए पदस्थ कुछ स्थानीय अफसरों को नोटिस भी जारी किए हैं।

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