स्ट्रीट वेंडर्स को लोन बना मजाक - Bichhu.com

स्ट्रीट वेंडर्स को लोन बना मजाक

भोपाल (राजीव चतुर्वेदी/बिच्छू डॉट कॉम)। मध्यप्रदेश सरकार द्वारा कोरोना काल से उबरने स्ट्रीट वेंडर्स को लोन देकर अपने रोजगार को पुन: खड़ा करने की योजना शुरू की गई है। इसके तहत बैंकों द्वारा लोन दिए जाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। लेकिन बता दें कि इस योजना में स्ट्रीट वेंडर्स के साथ बड़ा मजाक किया जा रहा है। बैंक लोन के लिए अच्छी खासी स्टाम्प ड्यूटी इनसे मांग रही हैं। लोन पर दस फीसद तक स्टाम्प ड्यूटी लगाई जा रही है, जिससे इन गरीबों में रोष है। अब ये ड्यूटी खत्म करने की मांग भी उठ रही है। उल्लेखनीय है कि बैंकों द्वारा लोन दिए जाने से पहले धन प्राप्ति के लिए ऐसे सारे उपाय किए जाते हैं, जो शासकीय नियमों के दायरे में आते हैं। अफसरों के मुताबिक राज्य सरकार भले ही लोन पर बैंक गारंटी देने के बाद कहती है, पर अस्सी फीसदी मामलों में बैंक इसे नहीं मानते हैं। बैंक लोन लेने वाले व्यक्ति की कोई ना कोई ऐसी संपत्ति लोन के साथ जरूर अटैच करते हैं, जो उसकी निजी संपत्ति होती है, क्योंकि बैंक गारंटी के बाद भी दिए गए लोन की वापसी का भरोसा बैंकों को नहीं होता है।

एक हजार की स्टाम्प ड्यूटी भी
स्ट्रीट वेंडर्स की स्कीम के मामले में भी यही स्थिति सामने आ रही है। बैंकों द्वारा इसके लिए लोन देने के साथ लोन लेने वाले की संपत्ति अटैच करने और दिए गए लोन पर स्टांप शुल्क वसूलने का काम किया जा रहा है। इसके अलावा पावर आॅफ अटॉर्नी और अन्य तरीकों से भी राशि ली जा रही है। इस तरह देखा जा रहा है कि 10000 के लोन पर 1000 स्टांप ड्यूटी और अन्य सुविधा शुल्क के नाम पर बैंक वसूली कर रहे हैं।

कोरोना काल से उबरने, योजनाओं में रियायत नहीं
दरअसल कोरोना काल में स्ट्रीट वेंडर्स और छोटे लघु उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार द्वारा कुछ योजनाएं शुरू की गई है। लेकिन लोन दिए जाने के साथ ही और अन्य कार्यों के नाम पर अच्छी खासी रकम इन लोगों से वसूली जा रही है। इसका विरोध भी शुरू हो गया है। बताया जा रहा है कि लोन लेने वाले व्यक्ति से स्टांप ड्यूटी के रूप में 10 फीसदी तक राशि ली जा रही है। इन हालातों में जब लोगों को रोजगार के लिए जद्दोजहद करनी पड़ रही है, तो इस तरह की ड्यूटी खत्म करने की मांग भी उठ रही है।

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