सोर्स मनी बंद करने से पुलिस महकमा बैक फुट पर - Bichhu.com

सोर्स मनी बंद करने से पुलिस महकमा बैक फुट पर

मुखबिरों की मदद से पुलिस ने सुलझाई कई अनसुलझे मामलों की गुत्थियां

भोपाल (मनोज विजयवर्गीय/बिच्छू डॉट कॉम)। पुलिस महकमा और गुप्तचर एजेंसियां हमेशा से ही मुखबिरों पर आश्रित रहीं है। इन्ही की सक्रियता के चलते ही विभाग कई अनसुलझे मामलों की तह तक पहुंचने में कामयाब हुआ है। पुलिस विभाग को ऐसे मुखबिरों और सूचना तंत्रों को सक्रिय बनाए रखने के लिए कुछ राशि यानि कि सोर्स मनी देनी पड़ती है। लेकिन पिछले कुछ वर्षों से मुखबिरों को पैसा न मिलने से वे निष्क्रिय हो गए हैं। इसी का परिणाम है कि लॉकडाउन और उससे पहले के कई संगीन अपराधों में पुलिस बैकफुट पर नजर आ रही है। हालांकि इस स्थिति को देखते हुए पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी इसको सक्रिय करने की जुगत में लगे है। पीएचक्यू के इंटेलिजेंस शाखा द्वारा मध्यप्रदेश के सभी जिलों में सूचना तंत्र के नाम से फंड जारी किया जाता है।
सूचना तंत्र, पीएचक्यू, इंटेलिजेंस शाखा सभी जिलों को जारी
जाली नोट बनाने वाले गिरोह का मामला हो, या फिर देह व्यापार की सूचना, इसके अलावा जुआं-सट्टे, अवैध शराब का परिवहन, इसके अलावा कई अंधे कत्लों की गुत्थियां पुलिस ने मुखबिरों की मदद से हल की है। लेकिन पिछले कुछ माह से अपराधों में बढ़ोत्तरी हुई है, उस अनुपात में पुलिस अपराधियों को दबोचने में नाकाम साबित हुई है। इसका कारण है पुलिस के मुखबिरों का निष्क्रिय होना, जिसकी मुख्य वजह है उनके द्वारा दी जाने वाली जानकारी के बदले में उन्हे पैसा नहीं मिलना। दरअसल विभाग द्वारा सोर्स मनी के नाम से मुखबिरों को उनकी सूचना के हिसाब से पुलिस पैसा देती है, लेकिन ये पैसा मुखबिरों तक नहीं पहुंच पा रहा है, इसका नतीजा है कि पुलिस का सूचना तंत्र बेहद ही कमजोर हो चुका है। पैसा न मिलने के कारण वे भी अपराधों की सूचना पुलिस को देने में दिलचस्पी नहीं दिखा रहे है।
मुखबिरों को नहीं मिल रही है पुलिस से तवज्जो
कुछ वर्षों पूर्व तक थाना प्रभारी सहित कई आला अधिकारियों के मुखबिरों से अच्छे संबंध हुआ करते थे। इसकी वजह थी कि मुखबिरों को जानाकरी देने के हिसाब से पुलिस उन्हें पैसा देने के अलावा थाना स्तर के उनके छोटे-मोटे काम भी कर दिया करती थी। लेकिन अब पुलिस न तो मुखबिरों को ठीक से पैसा दे रही है, और उनके काम के लिए भी टाल-मटौल करती है। इसी वजह से मुखबिरों ने भी पुलिस के प्रति अपना रूख बदल लिया है। अब अपराधों की बढ़ती संख्या को देखते हुए वरिष्ठ अधिकारियों ने एक बार फिर पुलिस के खुफिया तंत्र यानि कि मुखबिरों को सक्रिय करने का मन बनाया है। इसके लिए वरिष्ठ अधिकारियों ने कार्ययोजना तैयार कर ली है। जल्द ही मध्यप्रदेश में फिर से मुखबिर तंत्र सक्रिय होने की उम्मीद जताई जा रही है।
-इन एजेंसियों ने मुखबिरों के दम पर किए खुलासे
मध्यप्रदेश में पुलिस विभाग एवं सुरक्षा एजेंसियों ने कई अनसुलझे रहस्यों को मुखबिरों के दम पर हल किया है। इसमें क्राइम ब्रांच, इंटेलिजेंस विंग, एटीएस, एसटीएफ, सायबर सेल, नक्सली गतिविधियों की सूचना एकत्र करने वाली स्पेशल इंटेलिजेंस ब्यूरो शामिल है। प्रदेश में ऐसे कई उदाहरण मौजूद है, जिनमें मुखबिरों की मदद से कई बड़े एवं अहम केस सुलझाने में मदद मिली है।
इंटेलिजेंस शाखा करता है राशि का वितरण
प्रत्येक वर्ष विधानसभा के बजट सत्र में पुलिस विभाग के लिए फंड दिया जाता है। इसमें से पुलिस मुख्यालय की इंटेलिजेंस शाखा द्वारा मुखबिरों को प्रदान करने के लिए बड़ी राशि प्रदेश के सभी जिलों में वितरित की जाती है। ये राशि प्रत्येक जिले के डीआईजी अथवा एसपी के पास पहुंचती है। यहां से सभी थानों के मुखबिरों के हिसाब से राशि का वितरण कर दिया जाता है। पुलिस के कर्मचारियों को उत्कृष्ट कार्य करने के लिए इसी राशि में से ही उन्हें ईनाम से नवाजा जाता है। दिलचस्प बात यह है कि प्रदेश के सभी जिलों में सूचना तंत्र के नाम पर इस राशि का वितरण करने वाली इंटेलिजेंस शाखा के पास ही सूचना तंत्र का आभाव देखने को मिल रहा है।

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