प्रदेश में 25 हजार पुलिस बल की कमी - Bichhu.com

प्रदेश में 25 हजार पुलिस बल की कमी

भोपाल (प्रणव बजाज/बिच्छू डॉट कॉम)। मध्यप्रदेश में लंबे समय से आईपीएस सहित आरक्षक तक के अधिकारियों की बेहद कमी है। पुलिस मुख्यालय की रिपोर्ट के मुताबिक इस वर्ष के अंत तक 25 हजार से अधिक बल की कमी से विभाग को जूझना पड़ेगा। पुलिस विभाग में अधिकारियों-कर्मचारियों की नई भर्तियां नहीं होने की वजह से बल में तेजी से कमी आई है। पुलिस महकमे में बीच-बीच में छुटपुट भर्तियां होती रही है, लेकिन पिछले तीन साल में कोई बड़ी भर्ती नहीं होने से स्थिति चिंताजनक है। हालांकि विभाग में जल्द ही बंपर भर्तियों का अश्वासन दिया जा रहा है।

प्रदेश की साढ़े सात करोड़ जनता की सुरक्षा का दारोमदार और अपराधिक गतिविधियों पर नकेल कसने वाला पुलिस विभाग ही बल की कमी से जूझ रहा है। अपराध विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में प्रदेश और तेजी से पुलिस बल की कमी से जूझने जा रहा है। इसका मुख्य कारण है कि मध्यप्रदेश में पिछले दो साल से पुलिस कर्मचारियों के रिटायरमेंट पर रोक लगी थी, जिसकी वजह से बल की कमी स्थिर हो गई थी। लेकिन अब रिटायरमेंट की प्रक्रिया फिर से शुरू होने की वजह से पुलिस कर्मचारियों के थोकबंद रिटायरमेंट होंगे, जिसके चलते बड़ी संख्या में पुलिस बल की कमी को महसूस किया जाएगा। जिसकी वजह से अपराधों में बढ़ोत्तरी होने से भी इंकार नहीं किया जा सकता।

सुरक्षा एजेंसियों का काम भी प्रभावित
बल की कमी के चलते सबसे अधिक सुरक्षा एजेंसियोें का काम प्रभावित हो रहा है। इन एजेंसियों में क्राइम ब्रांच, एटीएस, सायबर सेल, नक्सली गतिविधियों की सूचना एकत्रित करने वाली स्पेशल इंटेलिजेंस ब्यूरो के अलावा एसटीएफ एवं अन्य विभाग शामिल है। बल की कमी के चलते ये एजेंसियां अपने काम को उस मुकाम तक नहीं पहुंचा पा रही है, जिनके लिए इन्हें जाना जाता है। इन एजेंसियों में एक तरफ तो बल की कमी है, वहीं दूसरी तरफ वीआईपी मूवमेंट एवं अन्य कार्यों के लिए भी इनकी ड्यूटी लगा दी जाती है, जिसके चलते इनका कार्य प्रभावित होता है, और ये अपना सौ प्रतिशत योगदान नहीं दे पाते, जिसकी वजह से इनकी विश्वसनीयता भी कम हो रही है।

कई बार अटकी है भर्ती की प्रक्रिया
पुलिस महकमे में बल की कमी पिछले कई महीनों से खल रही है। पूर्व के वर्षों में भर्ती प्रक्रिया की कई बार रूपरेखा तैयार की गई, लेकिन अलग-अलग वजहों से हर बार यह ठंडे बस्ते में चली जाती है। पिछले वर्ष ही पुलिस मुख्यालय ने पुलिस बल की भर्ती का मसौदा तैयार कर शासन को भिजवाया था। लेकिन राजनैतिक कारणों के चलते इस प्रस्ताव को अमलीजामा नहीं पहनाया जा सका। इसके अलावा विधासभा चुनाव और इसके बाद लोकसभा चुनाव के चलते भर्ती प्रक्रिया टलती रही। इसी वर्ष अप्रैल में बल की बंपर भर्ती का प्रारूप पीएचक्यू ने तैयार कर शासन को भेजा था, जिसे स्वीकृत भी कर लिया गया था। लेकिन कोरोना संक्रमण की वजह से लगे लॉकडाउन के चलते यह भी ठंडे बस्ते में चला गया। हालांकि गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने शुक्रवार को ही भर्ती की पॉलिसी के लिए मंजूरी दे दी है। इसलिए माना जा रहा है कि अब बड़े पैमाने पर विभाग में भर्ती का रास्ता साफ हो गया है।

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