किसानों की सब्सिडी को लेकर सरकार धर्मसंकट में - Bichhu.com

किसानों की सब्सिडी को लेकर सरकार धर्मसंकट में

भोपाल (दीपेश मिश्रा/बिच्छू डॉट कॉम)। प्रदेश के किसानों को मिलने वाली बिजली बिलों में मिलने वाली सब्सिडी को लेकर शिवराज सरकार धर्मसंकट की स्थिति में फंसी हुई है। दरअसल केंद्र सरकार के फरमान के अनुसार प्रदेश में विद्युत अधिनियम 2003 योजना को लागू किया जाना है जिसके बाद किसानों को बिजली बिलों में मिलने वाली सब्सिडी की राशि को सीधे बिजली कंपनियों को न देकर, सीधे किसानों के खातों में जमा करवाया जाएगा। लेकिन योजना को लेकर दुविधा यह है कि सब्सिडी की राशि पाने के लिए किसानों को पहले पूरा बिजली का बिल जमा कराना होगा। इससे किसानों को सब्सिडी तो मिलेगी, लेकिन पहले उसको भारी-भरकम राशि बिजली बिलों के रूप में जमा करानी होगी। यदि राशि समय पर जमा नहीं हुई तो सब्सिडी तो मिलेगी नहीं, वहीं बिजली कंपनियों की कार्रवाई से भी निपटना होगा। हालांकि मामले को लेकर विभाग में फिलहाल कोई औपचारिक निर्णय नहीं लिया गया है। लेकिन सूत्रों की माने तो मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस योजना को लागू करने के निर्देश भी पिछले दिनों ऊर्जा विभाग की समीक्षा बैठक के दौरान दे दिए है। अब विभाग के अधिकारी योजना को गुपचुप तरीके से अमलीजामा पहनाने में जुट गए है। साथ ही वित्त विभाग में भी सब्सिडी की राशि अब ऊर्जा विभाग को न देकर सीधे किसानों के खातों में ट्रांसफर करने की तैयारी कर ली है। वहीं प्रशासनिक सूत्रों की माने तो केंद्र सरकार फिलहाल भाजपा शासित राज्यों में इस योजना को लागू कर इसका ट्रायल करना चाहती है।

अगले माह से लागू होगा विद्युत अधिनियम 2003
विभागीय सूत्रों के अनुसार सरकार प्रदेश में विद्युत अधिनियम 2003 लागू करने की तैयारी कर ली है। केंद्र सरकार के निदेर्शों के अनुसार प्रदेश में बिजली के क्षेत्र में सुधार के लिए रिकवरी को बेहतर बनाया जाए। इसके लिए केंद्र सरकार जल्द ही विद्युत अधिनियम 2003 में संशोधन भी करने जा रही है। इसके बाद किसानों को बिजली बिल जमा करने के बाद ही मिलने वाली सब्सिडी की राशि सीधे खातों में प्राप्त होगी। इसके लिए प्रदेश के किसानों को करीब नौ हजार करोड़ रुपए अतिरिक्त जमा कराने होंगे। फिलहाल प्रदेश में किसानों को रियायती दरों पर ही बिजली दी जा रही है। लेकिन योजना के लागू होने के बाद सरकार कंपनियों को सब्सिडी की राशि न देकर किसानों के खातों में ट्रांसफर करेगी, जिससे अब बिजली कंपनियां किसानों से पूरा भुगतान वसूल करेगी।

प्रदेश में बिजली बिलों में सब्सिडी का गणित
शिवराज सरकार के पिछले कार्यकाल में प्रदेश के किसानों की सब्सिडी के लिए लगभग 12 हजार करोड़ रुपए से अधिक की राशि खर्च कर रही थी। कमलनाथ सरकार ने इंदिरा गृह ज्योति योजना लागू कर घरेलू बिजली उपभोक्ताओं को सब्सिडी देने का ऐलान किया, जिसके बाद कुल सब्सिडी की राशि लगभग 15500 करोड़ रुपए हो गई थी। हालांकि शिवराज सरकार की वापसी के साथ ही नाथ कैबिनेट की योजना पर ब्रेक लगा दिया गया। वहीं अब शिवराज सरकार अपनी संबल योजना को फिर से सब्सिडी के दायरे में लाने की योजना बना रही है।असके अलावा अनुसूचित जाति एवं जन जाति के किसानों को फ्री सप्लाई के नाम पर 2500 करोड़ रुपए एवं कृषि सब्सिडी के लिए 8500 करोड़ रुपए की राशि दी जा रही है। प्रदेश में अजा-जजा वर्ग के किसानों को 5 एचपी तक सप्लाई फ्री है। वहीं सामान्य श्रेणी के किसानों को 10 एसपी तक 700 रुपए प्रति एचपी और 10 एचपी के अधिक को 1400 रुपए प्रति एचपी देना होता है।

क्या है विद्युत अधिनियम 2003
बिजली के क्षेत्र में सुधार के लिए केंद्र सरकार द्वारा लागू किया जाने वाला विद्युत अधिनियम 2003 में सब्सिडी वैसे ही मिलेगी, जैसी फिलहाल गैस सिलेंडरों में दी जाती है। इसमें उपभोक्ताओं को सिलेण्डर लेते समय पूरा पैसा देना होता है, जिसके एक दो दिन बाद सब्सिडी की राशि उपभोक्ता के खातों में आ जाती है।

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