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चीनी-चीनी, भाई-भाई

भोपाल, (राकेश व्यास/बिच्छू डॉट कॉम)। मध्यप्रदेश में 24 सीटों पर होने वाले उपचुनाव से पहले सूबे की राजनीति चाइना पर शिफ्ट हो गई है। भाजपा की वर्जुअल रैली के दौरान पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कांग्रेस पर चाइनीज एबेंसी से डोनेशन लेने के आरोप क्या लगाए, सभी नेता कांग्रेसियों की कुंडली खोलने में जुट गए। दिल्ली में एक के बाद एक सोनिया गांधी और राहुल गांधी पर लग रहे आरोप की झड़ी अब मध्यप्रदेश तक आ पहुंची है। नड्डा के बयान के बाद प्रदेश भाजपा के नेताओं ने पूर्व सीएम कमलनाथ पर वार शुरू किया है। सबसे पहले भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रभात झा ने कमलनाथ पर चीन का एजेंट होने के आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार में वाणिज्य और उद्योग मंत्री रहते हुए चीन के हित में कार्य किया। इसके बाद प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा ने आरोप लगाया कि कमलनाथ ने गांधी परिवार को खुश करने के लिए वाणिज्यकर मंत्री रहते हुए चीन से राजीव गांधी फाउंडेशन को गलत तरीके से डोनेशन दिलवाने का काम किया। नाथ के इस कदम से देश के तमाम छोटे-बड़े कारोबारियों को नुकसान उठाना पड़ा। अब पूर्व मंत्री अजय विश्नोई ने कमलनाथ पर संगीन आरोप लगाए हैं।
इन आरोपों में कितनी सच्चाई है और यह राजनीति से कितने प्रेरित हैं, यह अलग बात है, मगर बात निकली है, तो दूर तक तो जाएगी। कांग्रेस और कमलनाथ पर आरोप लगाने में जुटी भाजपा यह भूल गई कि शिवराज के पूर्व के कार्यकाल में चीन की कंपनियों को मध्यप्रदेश लाने तक कितनी जद्दोजहद की गई। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान तो वहां निवेशकों को रिझाने रोड शो तक कर आए। हालांकि, चीन से इस दौरान कोई बड़ा निवेश तो आया नहीं, लेकिन उन्हें रियायत देने की तमाम घोषणाएं जरूर हो गईं। ये घोषणाएं अगर स्वदेशी कंपनियों के लिए की गई होतीं तो शायद मध्यप्रदेश का औद्योगिक परिदृश्य बदल गया होता। खैर अभी तो पूरी पटकथा चीन का एजेंट तय करने की लिखी गई है। सारी बातें आरोपों के दायरे में हैं, मगर यह देखना गौरतलब होगा कि जनता किसे असली एजेंट तय करती है कमलनाथ को या फिर शिवराज को।
क्या कहा था प्रभात झा ने
भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रभात झा ने आरोप लगाया था कि कमलनाथ ने कांग्रेस सरकार में वाणिज्य और उद्योग मंत्री रहते हुए चीन के हित में कार्य किया है। इससे जुड़े दस्तावेज भी सामने आए हैं। झा ने कहा कि जो भी दस्तावेज सामने आए हैं, उनके आधार पर मैं अपनी भाषा में कहूं कि कमलनाथ चीन का एजेंट बनकर वाणिज्य मंत्री के रूप में कार्य कर रहे थे, तो मुझे कोई दुख नहीं होगा। झा ने यह भी कहा कि चीन की कम्युनिस्ट पार्टी और भारत की पार्टी कांग्रेस के बीच बहुत सारी बातों का समझौता होता है। इसी क्रम में एक समझौता हुआ कि भारत में जो सामान सहजता से उपलब्ध है, उसका आयात बढ़ाया जाए। ऐसी 250 वस्तुएं चिंहित की गयीं, जिनका आयात करने का तय हुआ। इसके अलावा आयात पर टैक्स भी भी 100-200 प्रतिशत से घटाने की बात तय हुई।
पूर्व मंत्री विश्नोई के आरोप
पूर्व मंत्री और पाटन से विधायक अजय विश्नोई ने सीएम शिवराज सिंह चौहान को एक पत्र लिखा है। उन्होंने पत्र के जरिए पूर्व सीएम पर बहुत ही गंभीर आरोप लगाए हैं। अजय विश्नोई ने कहा कि चीन की एक कंपनी जेटीटी ने 2013 में भारत में अपनी एक शाखा खोली है, जिसका नाम जेटीटी इंडिया प्राइवेट लिमिटेड है। मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी ने टेंडर नंबर टीआर-19/2019 के विरुद्ध इस कंपनी को दिनांक 17 मार्च 2020 को 271 करोड़ रुपए का एक ठेका दिया है। यह टेंडर कंपनी को डाटा ट्रांसफर करने हेतु फाइबर नेटवर्क की स्थापना करना था। साथ ही टेंडर की शर्तों के अनुसार कुल काम को 3 हिस्सों में बांटा जाना था। एल1 को 50 फीसदी, एल2 को 30 फीसदी और एल3 को 20 फीसदी काम मिलना था। अजय विश्नोई ने आरोप लगाया है कि इस शर्त के हिसाब से काम बंटना तय था। इसलिए कंपनियों ने आपस में मिलीभगत से ज्यादा रेट डाले। चीन की कंपनी ने साथी कंपनियों को धोखा देते हुए तत्कालीन सीएम और ऊर्जा मंत्री को प्रभावित करके टेंडर की शर्तों की अवहेलना करते हुए 271 करोड़ रुपए का पूरा काम स्वयं ले लिया।
2016 में शिवराज गए चीन, लौटे खाली हाथ
2016 में चीन के 5 दिन के दौरे पर गए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने वहां की कंपनियों से निवेश लेने क्या-क्या जतन किए थे, बताने की जरूरत नहीं। शिवराज का यह दौरा 19 से 23 जून का था, मगर न जाने क्या सूझी कि अचानक दौरा एक दिन और बढ़ा दिया गया। इस दौरे के समय चीन की मोबाइल कंपनी ओप्पो ने प्रदेश में निवेश की इच्छा जताई थी और बात पूरी फाइनल थी, मगर सर्विस सेंटर से ज्यादा बात आगे नहीं बढ़ पाई। अपने चीन दौरे के पांचवे दिन मुख्यमंत्री ने डाली और ओप्पो के बिजनेस हेड से मुलाकात की थी और उन्हें मध्यप्रदेश में निवेश करने के लिए आमंत्रित किया था। मुख्यमंत्री ने चीन के उद्योगपतियों को इंदौर में होने वाली ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में आने का न्योता भी दिया था। इसका कोई फायदा नहीं मिला।
शिवराज सरकार ने बिछाया रेड कारपेट
कोरोना संकट के बाद चीन से शटरडाउन करके बाहर निकल रहीं जापानीज, यूरोपीयन और अमेरिकन कंपनियों के लिए मध्यप्रदेश में भी रेड कारपेट बिछाने की तैयारी चल रही है। इस कड़ी में राज्य सरकार ने निवेश को आकर्षित करने के लिए देश के दिग्गज उद्यमियों की एक समिति का गठन किया है। इसके सदस्य सरकार के लिए सिफारिश तैयार कर रहे हैं सिफारिशों का मुख्य फोकस यही रखा है कि चीन से शटरडाउन करके भारत आने वाली कंपनियों को कैसे मप्र लाया जा सकता है। राज्य सरकार हर जिले में उपलब्ध उद्योग विभाग की जमीन की भी जानकारी जुटा रही है। समिति में शामिल उद्यमियों जैसे आईटी से जुड़े उद्यमियों से कहा है कि वे आईटी व दूसरी टेक्नोलॉजी से जुड़ी कंपनियों को मप्र लाने के लिए क्या सुविधाएं देना पड़ेगी, उनकी सूची बनाएं। ऑटो मोबाइल सेक्टर से जुड़े उद्यमियों से नई ऑटोमोबाइल कंपनियों को आकृष्ट करने के लिए जरूरी सुविधाओं की सिफारिश देने को कहा है। ऑटो मोबाइल, टेक्नोलॉजी, रोबोटिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस, ऑटोपाट्र्सर जैसी कंपनियों पर फोकस है।
चीनी कंपनियों को लुभाने शिव सरकार का अभियान
मध्य प्रदेश में निवेश के लिए चीनी कंपनियों को लुभाने के लिए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने एक अभियान शुरू किया है, जिसमें कहा गया कि उन्हें कारखानों और विनिर्माण इकाइयों की स्थापना के लिए चार नई औद्योगिक टाउनशिप और जोन की विशेष सुविधा दी जाएगी। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार बुनियादी ढांचा, खाद्य प्रसंस्करण और खनन जैसे विशिष्ट क्षेत्रों में निवेश करने के इच्छुक चीनी फर्मों को बाहर का रास्ता देने के लिए तैयार है। चार पहचान किए गए स्थानों में पीथमपुरा, विक्रम उद्योगपुरी, दमोह और सीतापुर हैं। चार साइटों में दिल्ली-मुंबई औद्योगिक गलियारा शामिल है। मुख्यमंत्री ने ने निवेश के लिए एशियाई बुनियादी ढांचे के निवेश बैंक से भी मदद लेने से परहेज नहीं करने को कहा है।
इधर चीनी कंपनी पर मेहरबानी, मायल पर नहीं की कार्रवाई
एक तरफ भाजपा कमलनाथ पर चीन का एजेंट होने का आरोप लगा रही है, वहीं दूसरी ओर बालाघाट में चीनी कंपनी मायल ने मध्यप्रदेश के मजदूरों को नौकरी से निकाल दिया, इस पर सरकार के कान में जूं तक नहीं रेंगी। जबकि कांग्रेस लगातार कार्रवाई की मांग करती रही। मामला दिल्ली पहुंचा तो मोदी सरकार ने जरूर रस्मी कार्रवाई कर मामले को रफा-दफा किया।
तन्खा ने दी कार्रवाई की चेतावनी
सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता व सांसद विवेक तन्खा ने ट्वीट करके कहा है कि कुछ दिनों में कमलनाथ के विरुद्ध भाजपा नेताओं द्वारा जो भ्रामक दुष्प्रचार किया जा रहा है, ऐसे व्यक्तियों, संस्थाओं के विरुद्ध जल्द गंभीर कानूनी कार्यवाही की जाएगी।

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