शरद पवार की राहुल को दो-टूक - Bichhu.com

शरद पवार की राहुल को दो-टूक

नगीन बारकिया


चीनी सेना के लद्दाख क्षेत्र में बढ़ रहे तनाव को लेकर जहां एक तरफ कांग्रेस नेता राहुल गांधी केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमले का कोई मौका नहीं चूक रहे वहीं उन्हें उन्हीं के सहयोगी दल एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने दो टूक लफ्जों में समझाया कि राहुल पहले 1950 से 1962 तक का इतिहास ढंग से पढ़ लें तब सब पता चल जाएगा कि कांग्रेस ने देश की जमीन कहां कहां छिनवाई। आज जो देश के विरुद्ध पार्टी विशेष के नेता कर रहे हैं वह देश के साथ छल है। राहुल के बयानों पर पवार ने कहा कि हम नहीं भूल सकते कि 1962 में क्या हुआ था।

सुभाष प्रतिमा सुभाष मैदान में क्यों नहीं?
राजधानी भोपाल के चौराहों के सौंदर्यीकरण का कार्य किया जाना है जिसके अंतर्गत रायसेन रोड पर प्रभात चौराहे का भी विकास किया जाना प्रस्तावित है। इस चौराहे पर नेताजी सुभाषचंद्र बोस की प्रतिमा वर्षों से स्थापित है लेकिन दुख की बात यह कि केवल नेताजी की जयंती के सिवा किसी को भी इस प्रतिमा का कोई ख्याल नहीं आता। हालत तो यह है कि कई लोगों को तो यह ध्यान भी नहीं कि यहां पर नेताजी की प्रतिमा भी है। इसका प्रमाण यह है कि कोई गलती से भी इस चौराहे को सुभाष चौराहा नहीं पुकारता है। जो भी बोलता है इसे प्रभात चौराहा ही कहकर बुलाता है। यहां प्रभात नाम का एक पेट्रोल पंप है। अब जब इस चौराहे के विकास की बात चली तो बताया गया है कि इस चौराहे पर स्थित सुभाष प्रतिमा को हटाया जाकर प्रभात पेट्रोल पंप के कोने में खड़ी कर दी जाएगी और वहां की रोटरी को खत्म किया जाएगा। चौराहे का विकास समय की आवश्यकता है लेकिन साथ ही यह भी ध्यान देना जरूरी है कि हमारे महापुरुषों का इस कारण किसी भी तरह अनादर न हो। नेताजी की प्रतिमा को किसी कोने में खड़ी करने की बजाय प्रतिमा को किसी ऐसी जगह पर स्थापित की जाना चाहिए जहां उन्हें पर्याप्त सम्मान भी मिले और जगह उपयुक्त भी हो। ऐसा स्थान सुभाष नगर स्थित मिनी खेल स्टेडियम या खेल मैदान से अच्छा कुछ हो नहीं सकता। इस मैदान का नाम सुभाष खेल मैदान, क्षेत्र का नाम सुभाष नगर, वार्ड का नाम नेताजी सुभाष वार्ड तथा हाई स्कूल का नाम भी सुभाष हाईस्कूल है। यही नहीं मरघट भी सुभाष के नाम पर है। कमी है तो केवल सुभाष प्रतिमा की। ऐसे में भला नेताजी की प्रतिमा स्थापित करने के लिए कोई दूसरा स्थान ढूंढने की जरूरत क्या है? पंप के किनारे तो कतई नहीं।

नड्डा की तारीफ से प्रदेश भाजपा में बेचैनी
हाल ही में दिल्ली में आयोजित वर्चुअल जनसंवाद रैली को संबोधित करते हुए ज्योतिरादित्य सिंधिया की उपस्थिति और योगदान को याद करते हुए उनके साथ किए गए वादों को सिंधिया की तारीफ के साथ दोहराया तो लगता है प्रदेश भाजपा में बेचैनी की लहर से दौड़ गई है। कारण यह है कि भाजपा अभी तक अपने नेताओं और कार्यकर्ताओं को नहीं समझा पा रही है कि कांग्रेस से सिंधिया के नेतृत्व में भाजपा में आए इन नेताओं का क्या योगदान है और उन्हें क्यों उपचुनाव में पार्टी का टिकट देकर प्रत्याशी बनाना जरूरी है। ध्यान देने योग्य है कि सिंधिया के नेतृत्व में छह मंत्रियों समेत 22 विधायकों ने कांग्रेस छोड़ कमलनाथ सरकार गिराने में बड़ी भूमिका निभाई थी। भाजपा में बेचैनी इस बात की है कि इन सभी सीटों पर यदि वर्तमान कांग्रेसी विधायकों को भाजपा का टिकट दे दिया गया तो पुराने भाजपाइयों को मनाना एक बड़ा काम होगा। सभी को भरोसा है कि संघ के भरोसे यह काम भी सही तरीके से अंजाम दे दिया जाएगा।

कोरोना से बढ़ी आत्महत्या की प्रवृत्ति
कोरोना के दौरान मरने वालों में आत्महत्या करने वालों की संख्या भी अच्छी खासी है। चेन्नई के मानसिक स्वास्थ्य संस्थान के निदेशक के अनुसार कोरोना के कुछ मामलों में पाया गया कि वायरस से संक्रमित पाए गए लोगों में तीव्र घबराहट सी पैदा होती जो कई बार डिप्रेशन का रूप ले लेती है। ऐसे में कुछ लोग आत्महत्या के कगार तक भी पहुंच जाते हैं। एक जानकारी के अनुसार मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं को लेकर मदद मांगने वालों की संख्या निरंतर बढ़ रही है।

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