साध्वी के बिगड़े बोल - Bichhu.com

साध्वी के बिगड़े बोल

प्रणव बजाज


भोपाल की सांसद साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर कुछ कहें और उस पर कोई विवाद न हो, ऐसा संभव ही नहीं है। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी को निशाना बनाते हुए साध्वी ऐसा बोल गईं कि यह बड़े विवाद को जन्म दे सकता है। भाजपा प्रदेश कार्यालय में प्रबुद्ध वर्ग सम्मेलन में पहुंचीं साध्वी ने कांग्रेस द्वारा चीन के मामले में खड़े किए जा रहे सवाल पर कहा कि विदेशी महिला के गर्भ से जन्मा कोई भी व्यक्ति राष्ट्र भक्त नहीं हो सकता। यहां साध्वी का इशारा सोनिया गांधी व राहुल गांधी पर था। कांग्रेस साध्वी के इस बयान को महिलाओं का अपमान बता रही है और महिला आयोग में शिकायत दर्ज कराने की बात कह रही है। साध्वी के इस बयान को महिला आयोग कितनी गंभीरता से लेगा, यह देखने वाला होगा।

विधायक की मंत्री बनाने की गुहार
अब तक तो सुना था कि मंत्री बनने विधायक लॉबिंग में लगे रहते हैं, मगर कोई विधायक मुख्यमंत्री से मंत्रिमंडल में शामिल करने की गुहार लगाए, ऐसा तो पहली बार हुआ है। प्रदेश में मंत्रिमंडल विस्तार की कवायद लगभग पूरी है और कोई बड़ा विघ्न नहीं आया तो मंगलवार को विस्तार हो भी जाएगा। मंदसौर संसदीय क्षेत्र के एक विधायक ने सीएम से मिलकर गुहार लगाई कि इस बार मंत्री नहीं बनाया तो अगला चुनाव हार जाऊंगा। हालांकि, उनकी गुहार लगता है कि काम नहीं आई है क्योंकि सीएम की प्रतिक्रिया कुछ खास नहीं रही थी। अब इन विधायक महोदय को निगम-मंडल में भी पद पाने की लालसा है। इनको लगता है कि इस दरवाजे से भी मंत्री पद न सही ओहदा तो मिल ही जाएगा। अब देखना है कि इन विधायक महोदय की हसरत पूरी होती भी है या नहीं।

मंत्रियों के बंगले पर नजर
कांग्रेस सरकार जब सत्ता में रही तो मंत्रियों ने अपनी पॉवर के हिसाब से बंगले ले लिए। उसका रंग-रोगन कराया। 15 माह में मंत्रियों को बंगला ऐसा प्रिय हुआ कि सत्ता जाने के बाद भी वे उसे खाली करने में ना-नुकुर करते रहे। मगर अब शिवराज सरकार ने बंगले खाली कराने सख्ती का रुख दिखाया है। मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर चल रही कवायद के बीच अब राज्य सरकार गृह विभाग ने तय किया है कि वह पूर्व मंत्रियों को आवंटित बंगलों को अपने कब्जे में लेगा। मंत्रिमंडल विस्तार होने के बाद नए मंत्रियों को बेदलखली के नोटिस तय किए जा चुके हैं। हालांकि ज्यादातर पूर्व मंत्रियों ने अभी तक कब्जा नहीं छोड़ा है। पूर्व मंत्री तरुण भनोत ने चार इमली स्थित आवास खाली कर दिया है। पूर्व मंत्रियों को अपने दायित्व के निर्वहन के लिए भोपाल में शासकीय परिवर्तन के बाद सभी को आवास खाली करने के लिए नियम अनुसार नोटिस दिए गए, लेकिन अब उन्होंने आवास रिक्त नहीं किए तो बेदखली के नोटिस देने पड़े।

फिर अहातों में टकराएंगे जाम
पहले कोरोना संक्रमण और फिर लॉकडाउन ने सरकार का गणित बिगाड़ दिया है। सरकार की कमाऊपूत शराब की बिक्री से भी वह राजस्व नहीं आ पाया, जिसकी उम्मीद थी। शराब दुकानों से फिलहाल उम्मीद के मुताबिक आय न होने के कारण सरकार ने राजधानी समेत पूरे प्रदेश की चुनिंदा दुकानों में फिर से बैठ कर शराब पीने को मंजूरी दी है। सरकार को शराब दुकानों से सीधे तौर पर करीब सात हजार करोड़ रुपए की आय होती है। मौजूदा वित्तीय वर्ष में लॉकडाउन की वजह से करीब दो महीने तक दुकानें बंद रही। फिर दुकानें खोलने को लेकर ठेकेदारों और सरकार के बीच ठन गई। लाइसेंस फीस को लेकर आमने-सामने आ गए। बातचीत से मामला नहीं सुलझ पाया। विवाद हाई कोर्ट तक पहुंच गया। हाई कोर्ट से अंतरिम आदेश आते ही भोपाल समेत कई जिलों में ठेकेदारों ने शराब दुकानें सरेंडर कर दी। ऐसे में आनन-फानन में कुछ दुकानें खोल कर आबकारी विभाग से चलवाई गई। इस सारे घटनाक्रम में शासन को रेवेन्यू का नुकसान उठाना पड़ा। यही वजह है कि सरकार को नियम बदलना पड़ा।

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